अविष्कार: बैक्टीरिया से तैयार होगी अब बिजली
लंदन। स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी लॉज़ेन (ईपीएफएल) के वैज्ञानिकों की एक टीम ने “एस्करैशिया कोली” नामक बैक्टीरिया की खोज की है। टीम के वरिष्ठ केमिकल इंजीनियर अर्डेमिस बोघोसियन ने बताया, इंजीनियर ‘ई कोली कई प्रकार के स्रोतों पर विकसित हो सकता है।
वजह से अपशिष्ट जल में इसे पैदा कर वातावरण में बिजली का उत्पादन करने में सफलता मिल सकती है।’ अर्डेमिस के अनुसार, ‘वैज्ञानिकों ने पहले ही कुछ सूक्ष्मजीवों की पहचान कर ली थी जिनसे नैचुरली बिजली का उत्पादन किया जा सकता है, लेकिन ये केवल कुछ परिस्थितियों में ही संभव है। वहीं, स्विस शोधकर्ताओं द्वारा पैदा किया गया नया बैक्टीरिया विभिन्न प्रकार के वायुमंडलों में बिजली का उत्पादन कर सकता है। और इसे व्यापक और व्यावहारिक उपयोग के लिए व्यवहार्य बनाता है।
इसे विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों ने जीवाणु बिजली जनरेटर में से एक, शीवेनेला वनिडेंसिस में पाए जाने वाले प्रोटीन कॉम्प्लेक्स के नियमों का पालन करते हुए इसके जीनोम को संशोधित किया है। ऐसा करने से ई. कोली की इलेक्ट्रो-एक्टिविटी दोगुनी हो गई थी। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया है कि औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार के लिए शीवेनेला वनिडेंसिस की तुलना में ई. कोलाई अधिक उपयुक्त है। शराब बनाने वाली कंपनियों को आम तौर पर अनाज साफ करने और टैंकों को धोने के लिए उपयोग किए जाने वाले पानी का निपटान करने से पहले उसे साफ-सुथरा करना जरूरी होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें शर्करा, स्टार्च, अल्कोहल और खमीर का एक जटिल मिश्रण होता है।
ये अगर अनुपचारित छोड़ दिया जाए, तो यह अपशिष्ट जल में गैरजरूरी सूक्ष्मजीव वृद्धि का कारण बन सकता है। अपने शोध को सिद्ध करने के लिए वैज्ञानिकों की टीम ने स्विट्जरलैंड के लॉज़ेन में एक स्थानीय शराब की भठ्ठी से प्राप्त अपशिष्ट जल के नमूने का उपयोग किया। इंजीनियर ई. कोली सिस्टम का उपयोग करके इस पर प्रयोग भी किए। इस बैक्टीरिया ने 50 घंटों के भीतर इस अपशिष्ट जल को कुशलतापूर्वक स्वच्छ कर दिया था।

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