पढ़ाई के बीच टूटी छत, बांसवाड़ा के स्कूल की जर्जर हालत उजागर
बांसवाड़ा: जिले के घाटोल क्षेत्र अंतर्गत अमरथून गांव के सरकारी विद्यालय में सोमवार को एक बड़ा हादसा होने से टल गया, जहां कक्षा के दौरान अचानक छत का हिस्सा ढह गया। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की ग्यारहवीं विज्ञान वर्ग की कक्षा में जब विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे थे, तभी जर्जर छत से प्लास्टर के बड़े टुकड़े छात्राओं के ऊपर आ गिरे। इस अप्रत्याशित घटना से पूरे स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया और चीख-पुकार शुरू हो गई। गनीमत यह रही कि मलबे का कोई भारी हिस्सा सीधे किसी विद्यार्थी के सिर पर नहीं लगा, जिससे एक बड़ी जनहानि होने से बच गई।
कक्षा में पढ़ाई के दौरान अचानक गिरा छत का मलबा
हादसे के वक्त छात्राएं अपनी टेबल पर बैठकर पढ़ाई में व्यस्त थीं, तभी अचानक जर्जर छत का प्लास्टर टूटकर उनके ऊपर गिर पड़ा। इस चपेट में आने से पूजा, काली कुमारी और शारदा कुमारी सहित कुल चार छात्राएं चोटिल हो गईं, जिन्हें तत्काल प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी चिकित्सा केंद्र ले जाया गया। स्कूल प्रशासन ने त्वरित कार्यवाही करते हुए घायल छात्राओं को अस्पताल पहुंचाया और शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को इस गंभीर स्थिति से अवगत कराया, जिसके बाद प्रशासनिक अमले में भी खलबली मच गई।
प्रशासनिक अधिकारियों ने लिया जर्जर भवन का जायजा
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी पवन कुमार रावल और एसडीएम मनसुख डामोर सहित राजस्व विभाग की टीम ने विद्यालय का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने जर्जर हो चुके कमरों की स्थिति को बेहद चिंताजनक माना और स्कूल प्रबंधन को सख्त निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसे खतरनाक कक्षों में विद्यार्थियों को न बैठाया जाए। प्रशासन ने स्कूल की मरम्मत के लिए तुरंत बजट आवंटित करने और नई प्रयोगशालाओं के साथ-साथ सुरक्षित क्लासरूम के निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
ग्रामीणों का आक्रोश और सुरक्षा मानकों पर सवाल
विद्यालय भवन की बदहाली को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है और बड़ी संख्या में लोगों ने स्कूल पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि भवन की दयनीय स्थिति के बारे में कई बार लिखित शिकायतें और ज्ञापन दिए जा चुके थे, लेकिन अधिकारियों ने किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किया और समय रहते मरम्मत नहीं कराई। अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि विद्यार्थियों के जीवन के साथ खिलवाड़ बंद किया जाए और जर्जर हो चुके स्कूल भवनों का पुनरुद्धार प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए ताकि बच्चे सुरक्षित माहौल में शिक्षा ग्रहण कर सकें।

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